Episode 35 - Dr. Sunil Arya

Dr. Sunil Arya, an Ayurvedic physician with 25 years of experience, argues that strengthening your metabolic fire through sleep, diet, and stress management can reduce reliance on medicines. He recommends 7-hour sleep, daily 5-7 km walks, regular meal times, and avoiding food combinations like milk with fruit. Stress management, including eliminating pending tasks and limiting screen time, is critical.
Chapters
hello everyone and welcome to a new apिसोdelnesbotcast today we have डॉctrsुnel area with us, who is a डायनामिक आयुर्वेदिक डॉctrविच रिच expीरियeंस of over twenty five years in treating, cronic and chalenging helth problems th्रूआयुरवेda योगा and litil counciling in the last few years, he has delivered more than hundred लेc्चures न हॉव to stay heldy without medicine thru आयुर्वेदा लाइफसटाइल डिशनल ही हैज कंडक्टेड अबाउट टू fifty कैम ऑन योगा and heltavnsडॉrara is a membr ऑफ़ वेरी सोशियल कल्चरल enजियोज and urvedic medical association welcome doctor area it s a plesure to have you today her,
thank you get super।
थैंक यू सो मच for green for this podcast and the question that i want to start with you know initially is that now that morden day। हel्tकaर हैज टेकिंग ओवर सो मच पीपल थिंग आयुर्वेदा इस समथिंग विच इज होकम एंड नसली आई हैव बीन टोल दैट आयुर्वेदिक डॉक्टर आर क्वैक्स वात डू यू हैव टो से। अबाउट दैट
आपने पहला सवाल ही बहुत अफेंसिव कर दिया,
ये होता है डॉक्टर, जब भी मैं आयुर्वेदा के बारे में बात करती हूँ, बिकज म बिग फैन ऑफ आयुर्वेदा बट दिस इस, द फर्स्ट रेस्पोंस, दैट आई गेट सो, आई वाज लाइक वाई नॉट अड्रेस एट हेड ऑन। और सबसे पहले इसी को टाइटल किया जाए।
बिल्कुल ठीक बात है। देखिये अगर हम जो अभी ज्ञात इतिहास है, उसका हिसाब लगाएं तो लगभग 5 वर्ष पुराना यह विज्ञान माना जाता है। और ये 1 ऑब्जर्वेशनल साइंस की तरह शुरू होता है और जो एक्सपेरिमेंटल साइंस की तरफ जाता है। जो आज से 5000 वर्ष से जो सिद्धांत चले आ रहे हैं, वो आज भी उतने ही सटीक हैं जिन हब्स के बारे में। आज से 5000 वर्ष से लेकर अब तक जो जो कहा गया है वो अब तक भी सही साबित हो रहा है। जैसे उदाहरण के तौर पर अर्जुन को अर्जुन 11 हर्ब है, जिसकी छाल हम 1 पेड़ है, जिसकी छाल यूज करते हैं हार्ट के लिए, वर्षों हजारों वर्षों से हम अर्जुन को हृदय के लिए, हार्ट के लिए उपयोग करते आ रहे हैं। और मॉडर्न साइंस ने भी उसको उसी तरह से प्रभावशाली माना है। हल्दी को ले लें, नीम को ले लें, तुलसी को ले लें। कितनी ही सारी हर्ब्स हैं, जड़ी बूटियां हैं, जो हमारे आसपास क्षेत्री हुई हैं, फैली हुई हैं उन सबके बारे में जो जो रिसर्च नही होती जा रही है, सबको सही साबित होते जा रहे हैं। उसी तरह से जिस काम के लिए कहा गया है। आप इसको कह सकते हैं। 1 भाषा का फर्क है। आज की जो मॉडल साइंस है, वो जिस बात को, जिस त को, जिस भाषा में कहती हैं, हमने उस बात को किसी और भाषा में कहा हुआ है। धीरे धीरे वो भाषा का जो बैरियर है, वो खत्म होता जा रहा है। और ये वापस जो आयुर्वेद विज्ञान है, वो अपने पूरे भव से और उसी स्वरूप में साबित होता जा रहा है। तो ये कहना कि ये 1 फैक् है, जाती है मॉडल साइंस की तरफ
से, मुझे तो आयुर्वेद पर बहुत ट्रस्ट है और मेरे लिए बहुत काम किया है। आयुर्वेद लाइफस्टाइल मैनेजमेंट है बिकम पार्ट ऑफ मी नो मतलब लाइफस्टाइल मैनेजमेंट मेरे लिए यह नहीं है की मैंने आज किया और कल नहीं किया या परसों नहीं किया। इट इज समथिंग जो की मुझे रोज करना है दिस इस अंडरस्टूड की हमारा जो पुराने वेद पुराण में लिखा हुआ है देर इस रीजन बिहाइंड और उसको फॉलो नहीं करेंगे। तो जो मॉडन इल हेल्थ होता है जो भी प्रॉब्लम होती है इलनेस को लेकर। के दैट इज बिकाज वी आर नौट फॉलोइंग द ओल्ड आयुर्वेदिक एंड वेदिक प्रैक्टिसेज वी हैव बीन टोल्ड। तो मैं तो बहुत बड़ी फैन हूं आयुर्वेदा की एंड दैट इज बाई वी आर टॉकिंग टुडे एंड आर वान पीपल। तो अंडरस्टैंड की ये परस्पेक्टिव ले की क्यूँ आयुर्वेदा भी 1 साइंस है सो उसी के बारे में चर्चा करना चाहते है की हम लोगो को ये ट्रस्ट कैसे लाए क्यूँकी आज की डेट में जब भी कोई डॉक्टर के पास जाता है तो सबसे पहले वो ये बोलता है की आयुर्वेद और होमियो पति नाचरे पेथी हमारे थे डिस्कस मत करो उसमे स्टेरोइड्स होता है। तो इसके बारे में आपका क्या ख्याल है।
देखिये 1 दूसरा और 1 ऑफेंसिव प्रश्न है जो कि आम तौर पर हम भी झेलते हैं इस बात को और पेशेंट जो बहुत तरह तरह से परेशान हो कर के आते हैं। कुछ पढ़े लिखे लोग होते हैं जो गूगल में काफी सर्फिंग करके आते हैं। वो आते ही सबसे पहला प्रश्न होता है कि आप इनमें हमें स्टीरॉयड तो नहीं खिला रहे हैं। तो उसका जवाब यह होता है। यदि हमारे यहाँ आने से आप ठीक हो रहे हैं और ठीक होने की वजह केवल स्टेरॉयड ही होती तो आप जहाँ से बहुत घूम फिर कर के आ रहे हैं वहाँ तो आप लेजिटिमेट तरीके से स्टेरॉयड खाके आए ही होंगे। अगर स्टेरॉयड चीज का इलाज होता तो आप ठीक हो गए होते। तो ये 1 ऐसा मतलब 1 आरोप लगाया गया है आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के ऊपर, आप तो स्टीरायड खिलाते हैं। यह बिल्कुल ही भ्रामक है। हो सकता है कुछ लोग इस तरह से उसका मिसयूज करते रहे हो अपने प्रैक्टिस में तेजी लाने के लिए। तो ऐसे तो हर ही जगह, हर पैथी में कुछ न कुछ गड़बड़ करने वाले लोग होते ही हैं। तो वो गड़बड़ होती होगी, वो किसी व्यक्ति के द्वारा होती होगी। पैथी में अपने आप में ऐसा कुछ नहीं है कि वो कोई मिलावट करने की आवश्यकता पड़े। दूसरी बात यह है कि अगर किसी आप कंपाउंड को टेस्ट करते हैं, फॉर स्टेरॉयड्स तो ऐसी बहुत सी हब्स भी हैं जिनको आप टेस्ट कराते हैं तो वो स्ट्रट पॉजीटिव आ सकती है। तो इसलिए ये कहना कि आप आयुर्वेदिक चिकित्सक जो है वो ठीक करने के लिए स्टेरॉयड्स मिलाते ही हैं। ये दूसरा बड़ा 1 आरोप है जिसको की मैं बिल्कुल एक्सेप्ट नहीं कर सकता क्योंकि हम खुद मैं और हमारे बहुत सारे साथी में को देखता हूँ, पहचानता हूँ, भरोसा करता हूँ और जिन पर हम गर्व करते हैं बहुत सारे लोग हमारे हैं जो बिल्कुल ईमानदारी से प्रैक्टिस करते हैं। बहुत बढ़िया परिणाम मिलता भी है। तो स्टीरॉइड्स कोई ऐसी चीज नहीं है जिससे कोई बीमारी ठीक होती ही हो।
ओके सो डॉक्टर आप दावा करते हैं मेडिसिन फ्री लाइफ रहने की, तो ये कैसे हो सकता है क्योंकि आज की डेट में सबको ऐसी आदत हो गई है की थोड़ा पेन भी होता है। तो 1 पेन किलर खा लेते हैं। एंड आप बात कर रहे है मेडिसिन फ्री लाइफ की सो वो कोई कैसे अचीव कर सकता है और क्या ये पॉसिबल है।
देखिये बात क्या है कि हम रोगी क्यों होते है। पहले वो समझना चाहिए आयुर्वेद के सिद्धांत के हिसाब से जो हम रोग रोग ग्रस्त होते हैं। रोग हमको होता है और उसको मॉडल मेडिसिन भी मानती है। रोग होने के पीछे सबसे बड़ा कारण होता है इम्यूनिटी का कमजोर होना, जब बिगड़ जाना, जब हमारी इम्यूनिटी बिगड़ती है तो कोई भी बाहरी तत्व मान को फंगस बैक्टीरिया, वायरस कोई भी ऐसा जो बाहर से मिलने वाला ऑफेंस है बॉडी के ऊपर, वो सबसे पहले हमला करता है तो हमारी इम्यूनिटी उससे फाइट करती है, इम्युनिटी कमजोर होती है तभी हम रोगी होते है। दूसरे ये तो हो गया आपका इन्फेक्शियस डिजीज से बचने मतलब होने की वजह हो गई। दूसरा जो कारण है जो बहुत ज्यादा बढ़ रहा है वो है ऑटो म्यूट डिजीज और नॉन इनफेक्शियस डिजीज। वो हमारे अंदर से पैदा होती है। उनकी वजह भी यही है कि हमारे अंदर का जो एनवायरमेंट है जब वो बिगड़ता है तब ही वहां पर व्यवस्था बिगड़ती है और हमारे शरीर में रोग होने की संभावना बढ़ती है। तो हम अगर मेडिसिन फ्री लाइफ जीने की बात करते हैं। तो उसके पीछे सबसे बड़ी जो मेहनत है वो इस बात की होती है कि हम अपने अंदर के एनवायरनमेंट को कैसे दुरुस्त करें जिससे हमारी इम्युनिटी मजबूत हो। तो जो ड्रग फ्री लाइफ जीने के लिए सबसे पहले अपनी इम्यूनिटी पर बने अपने लाइफस्टाइल पर, अपने डाइट स्टाइल पर और अपने टेस्ट मैनेजमेंट पर काम करना पड़ता है। और छोटी छोटी चीजें होती हैं जिनको हम अक्सर इगनोर करते हैं। अब आज के जमाने में हमारे पास सुविधाएं तो बहुत बढ़ी है। शरीर में काम करने की क्षमता घटी है, मतलब काम करने की संभावनाएं घटी है। हम बैठे, बैठे सब काम कर लेते हैं। घर से उठे जाके, गाड़ी में बैठे कुर्सी पर, वहां से निकले, फिर ऑफिस में कुर्सी पर जा बैठे, फिर वापसी वही क्रम रहता है। अल्टीमेटली आकर फिर हम अपने घर में आकर भी चेयर या बैड पर रहते हैं और काम के नाम पर केवल आधा पंदा घंटे की वॉक कर लिया। इतना ही काफी होता है। जबकि देखें आप शरीर को बराबर सक्रिय बनाए रखने के लिए हमें फिजिकली खूब एक्टिव होना चाहिए। क्यों नहीं रहते हैं। तो ऐसी स्थिति में और क्या करते हैं उसकी वजह से क्या होता है नींद हमको कमाने लगती है, देर रात तक जागते हैं, सुबह देर से उठते हैं। तो जो बॉडी का जो बायो क्लॉक को बिगड़ जाता है। तो सबसे पहले क्या होता है? इन सब चीजों से हमारा पेट खराब होता है जो आय का सिद्धांत है। सबसे पहले हमारा पेट खराब होता है। पेट खराब होने का मतलब क्या है? अग्नि बिगड़ती है रजिस्ट्री फायर, मेटाबोलिक फायर। हमारे यहाँ आयुर्वेद में अग्नि को बहुत महत्व दिया गया है। जिंदा रहने के लिए सबसे पहली आवश्यकता है यदि प्राण वायु है, ऑक्सीजन है तो दूसरी बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है अग्नि मेटाबोलिक फायर। हमारे यहाँ कहते हैं सर्वे श्याम रोगान कारण, अग्नी माध्यम माने हर बीमारी का 1 ही कारण है, वो है अपनी अग्नि का बिगड़ जाना। अब यदि हम अपनी अग्नि को मजबूत बना कर रखते हैं तो हमारी इम्यूनिटी मजबूत रहेगी। और अंदर शरीर में रोग पैदा करने वाले कारणों को मिनिमाइज हम कर पाएंगे तो ड्रग फ्री लाइफ जीना है। तो हमें अपने लाइफस्टाइल को, डाइट स्टाइल को टेस्ट मैनेजमेंट पर ध्यान दे कर के और अपनी अग्नि को मजबूत बना कर के। हम कर सकत और हम करते हैं
से स्टार्ट करें। कोई इस तरह से लाइफस्टाइल मैनेजमेंट। मतलब कहाँ से। अगर कोई चाहता है की मुझे मेडिसिन फ्री लाइफ रहना है तो वो कहाँ से शुरुआत करे। डॉक्टर
आम तौर पर इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है। आप जिन दवाओं को ले रहे हैं, जिन बीमारियों को आप ट्वीट कर रहे हैं, दवाओं के माध्यम से उनको छोड़ दिया जाए। बिल्कुल नहीं कह रहा हूँ ऐसा करना चाहिए। हमेशा दवाओं को छोड़ने का क्रम बाद का है। पहले हम अपने आप को जो, जो चल रहा है उसके साथ संतुलित और सेहतमंद रहने की कोशिश करे। जैसे हम 7 घंटे की बढ़िया नींद लेने की कोशिश करें। जैसे हम सुबह सनराइज के पहले उठने का अभ्यास करें। जैसे दिन में 5 से 7 किलोमीटर तेज चलने का अभ्यास जरूर करें। जैसे खाने का समय हमारा नियमित हो, जैसे हम भूख से कम, खाएं जैसे रोगी हो जाने पर तुरंत दवाओं की तरफ न भागे। पहले शरीर को हम मौका दें। कुछ अपने आप को ठीक करने की कोशिश करें। अपनी इम्यूनिटी भरोसा रखे। जैसे हम ऋतु, अनुकूल आचरण, जिस ऋतु में, जिस मौसम में जैसा जैसा, हमको खाना पीना, रहना, सहना चाहिए, वैसा प्रयास करे। जैसे हमारी अपनी प्रकृति क्या है, प्रकृति का मतलब क्या है? यदि जैसे हमारे यहाँ जो प्रकृतियां होती है, वो आधारित है वात, पित कफ के आधार पर हमारा शरीर कौन से दोष का बाहुल्य रखता है, वा वाला है, पित वाला है कफ? उदाहरण के तौर पर जो व्यक्ति होते हैं उनको गर्म वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। उससे पित्त बढ़ता है, गर्मी बढ़ती है। इस तरह से अपनी प्रकृति को पहचान करके हम प्रयास करे। जैसे विरुद्ध दहर का सेवन न करे। विरुद का मतलब क्या होता है जो फूड, फूड, आइटम्स, 1 दूसरे के इनकंपेटेबल होती है। जैसे हमारे यहाँ कहते हैं दूध के साथ फल, दूध और दही, दूध, मूली, दूध, नमक। ऐसी और भी चीजें हैं जैसे शाम को दही का नहीं खाना, शाम को दही जो खाते हैं वो काल विरुद्ध है, ठीक नहीं है। इस तरह से बहुत सारी चीजें हैं जिनको हम ध्यान रख करके ब्रग फ्री लाइफ की तरफ बढ़ सकते हैं। जैसे पेट साफ होना चाहिए, रोज नियमित रूप से हमारा इवाक्युशन होना चाहिए। जैसे हम भूख के बारे में बहुत ध्यान रखे। अगर भूख न हो तो खाना न खाए, डिमांड न हो तो सप्लाई न करें, सिंपल तो छोटी छोटी चीजें हैं, जिनको ध्यान में रखकर के हम उस तरफ बढ़ सकते हैं। लेकिन तरफ बढ़ने के लिए किसी अनुभवी वैद्य की या किसी अपने वरिष्ठ व्यक्ति की सहायता जरुर लेनी चाहिए।
सही बात है एंड बहुत बड़ा रोल होता है। स्ट्रेस का लाइफस्टाइल मैनेजमेंट के ऊपर, एंड ऑफ कॉर्स डायजेशन के ऊपर, मेंटल हेल्थ एंड फिजिकल हेल्थ के ऊपर, तो उसको मैनेज करने के लिए आपका क्या एडवाइस रहेगा? लोगों को कि स्ट्रेस मैनेजमेंट कहाँ से स्टार्ट करे।
स्ट्रेस मैनेजमेंट के लिए 23 बातें हैं जो बहुत ध्यान रखनी चाहिए। सबसे पहले तो पेंडिंग छोड़ने की, आदत काम को पेंडिंग छोड़ने की आदत छोड़ देनी चाहिए, उसे बचना चाहिए। दूसरी बात क्या है अगर हम लंबे समय तक अपनी नींद को दिफाई करेंगे। आमतौर पर क्या होता है रात को 10 और साढ़े 10 के आस पास नींद का पहला साइकिल होता है। यदि उसको आप दिफाई करेंगे उसको छोड़ देंगे तो दूसरा साइकिल आएगा डेढ़ बजे के डेढ़ 2 के बाद। इसका मतलब यह हुआ कि यदि आपको अच्छी नींद लेनी है। मैं नींद की बात क्यों कर रहा हूँ, अगर ट्रेस मैनेज करना है तो 7 घंटे की बढ़िया नींद मेंडेटरी है। वैसे भी अगर नींद अच्छी होती है तो बॉडी के साइकोसोमेटिक जो रिपेयर्स होते हैं बहुत अच्छे से परफॉर्म होते है। इसलिए अच्छी नींद जरूरी है। स्ट्रेस मैनेजमेंट के लिए, अच्छी नींद के लिए क्या चाहिए, खूब फिजिकली, थकना, अच्छी नींद के लिए क्या चाहिए। रात का भोजन जल्दी हो, भूख से कम हो और जो हमारे गैजेट्स हैं, लैपटॉप हैं, फोन है, मोबाइल इन सबका जो यूज है वो लिमिटेड किया जाना चाहिए। और अगर टेस्ट से कम ऐसा है कि जो बहुत टेस्ट फुल है तो उसको अपने आप को 20 टेस्ट करने के लिए योगाभ्यास है। प्राणायाम की कुछ क्रियाएं हैं मॉर्निंग अच्छी बॉक है। इस तरह की चीजों का उपयोग किया जाना चाहिए। कुछ हब्स भी होती है जो इसमें बहुत सपोर्ट करती है पर वो सेकेंडरी आस्पेक्ट है। पहले शुरुआत यहीं से करनी चाहिए, पहले
शुरुआत यहीं से करना चाहिए। तो आपका कहना है कि अगर स्ट्रेस मैनेजमेंट करे, लाइफस्टाइल मैनेजमेंट करे तो हम डेफिनिटली मेडिसीन फ्री लाइफ जी सकते हैं।
मैं आपको 1 बात और बताना चाहता हूँ। स्ट्रेस मने तनाव बहुत सारी बीमारियों को न केवल शुरू करता है बल्कि बढ़ा देता है। जैसे मैं आपको बताऊँ डायबिटीज डायबिटीज। तो इस समय भारत देश उसकी राजधानी माना जाता है। आप सोच सकते हैं कि डायबिटीज के कितने लोग होंगे। पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा लोग यहीं पर है। डायबिटीज के डायबिटीज आप चाहे भले इंस्टीट ले रहे हो और आप अंडर डायबेटिक दवाएं ले रहे हों, कंट्रोल नहीं हो रहा? तो जरूर ये जांचना चाहिए कि आपका टेस्ट लेवल कैसा है। हमने देखा है। हमने अपनी प्रैक्टिस में पाया है कि इन्सुरेंस लेते हुए भी अगर अच्छे से कंट्रोल नहीं हो रहा तो केवल 1 से डेढ़ महीना उसको टेस्ट मैनेज करने के लिए एफर्ट किए गए। और उन्हीं दवाओं के साथ वो गुड कंट्रोल में वो पेशेंट आ जाता है। डायबिटीज के ऐसे ही मोटापा अपने आप में उसके लिंक स्ट्रेस का है, एसिडिटी का बहुत बड़ा लिंक है। स्ट्रेस से पाचन संबंधी जितने भी लोग हैं उन सब का स्ट्रेस से बहुत बड़ा लिंक है
जी।
इसलिए स्ट्रेस पर हम और ध्यान दिया जाना बहुत जरूरी है।
तो स्ट्रेस के लिए कोई 1 प्रैक्टिकल एडवाइज दीजिए डॉक्टर जो की हम डेली कर सकते हैं अपार्ट फ्रॉम फिजिकल एक्सरसाइज की जिसका हो सकता है जिनका स्ट्रेस मैनेजमेंट उतना अच्छा नहीं है एंड फिजिकल एक्टिविटी से भी कंट्रोल नहीं है तो वह अदर प्रैक्टिसेज मतलब वन कैन डू सो दैट की स्ट्रेस मैनेज हो सके उनका।
1 में बहुत कॉमन ली। अपने सब रोगी को बताता हूँ। स्ट्रेस कब ज्यादा होता है। जब बहुत सारी चीजें दिमाग में खट्टा रहती हैं, हम उनका आउटलेट उनको दे नहीं पाते। बहुत सारी बातें होती हैं, कह नहीं पाते है। हम खुद को बड़ा अव्यवस्थित किए हुए हैं, मल्टीपल हमारे पास काम का लोड है, हम उनको खत्म नहीं कर पा रहे हैं। काम का लोड लोड बढ़ता चला जाता है। बहुत सारी चीजें कहने को होती है हम कह नहीं पाते है। तो 1 बहुत छोटी सी एक्सरसाइज है कि हम सोने से पहले 1 पेज या 2 पेज फ्रीली लिखे पेपर पर वो उसका कोई 1 पहली वाली लाइन का लिंक, दूसरी से लाइन से लिंक हो न हो, कोई रेलिवेंस हो ना हो, किसके बारे में कुछ भी गन्दे से गन्दा, अच्छे से अच्छा जो मन में आया। बस बिना सोचे लिखते जाना जाना और उसको री रीड नहीं करना दोबारा नहीं पड़ना है। उसको क्या लिखा, स्पेलिंग में स्टेट तो नहीं लिखी। किसी के बारे में ठीक लिखा कुछ मतलब नहीं है। जहाँ आपका पेन रुक जाए वहाँ उसको रोकिए और बिना पड़े फाड़ के फेंक दीजिये। 3 से 45 दिन के बाद आप देखेंगे कि आपके दिमाग में बहुत कुछ कहने के लिए बहुत शिकायतें रही नहीं। दूसरी बात यह है कि जहाँ पर स्ट्रेस होता है, जिन व्यक्तियों को, उन व्यक्तियों के मन में बहुत सारी शिकायतें रहती हैं, लोगों के प्रति, व्यवस्था के प्रति, लोगों के प्रति, घर के प्रति, किसी न किसी के शिकायत रहती है। हम ये समझे जरूर उन शिकायतों से कुछ हासिल होने वाला नहीं है। और तीसरा 1 सूत्र में सबको देता हूँ बी एम जे एस। हालांकि सुनने में बड़ा अजीब सा लगता है, पर सच यही है। मैं सबसे कहता हूँ। बोलो भाड़ में जाओ सब बी एम जे एस बार बोलिए बालू बोलिए तो थोड़ा सा रिलैक्स होना शुरू हो जायेंगे। और जिंदगी बहुत छोटी सी है। जितना इसको अच्छे से खुशहाल करके जी सकते हैं। जीना चाहिए लोगों के साथ शिकायत रखते हैं। जीते रहने से कोई पूछे आप कैसे? बोले बहुत अच्छा हूँ मैं तो बोले कहा हो मैं तो स्वर्ग में हूँ तो सुनकर बड़ा अजीब लगता है पर इन चीजों को बार बार दोहराते रहना चाहिए और अपने आप को खाली रखने का प्रयास करना चाहिए व्यवस्थित रखने का प्रयास करना चाहिए उससे बहुत ट्रेस कम होता है और प्राणायाम की जो प्रैक्टिस है सुबह मॉर्निंग ब्रिस्क वॉक की प्रैक्टिस है वो बहुत अच्छा डिस् ट्रेस है अच्छी अपने मित्रों से रेगुलर मिलते, रहना, वीकेंड पर आउटिंग पर जाना, फैमली टाइम, स्पेयर करना ये सब चीजें बहुत अच्छा डिस् ट्रेस करती है
सो थैंक यू सो मच डॉक्टर आप आये और हमारे साथ आपने इनसाइड शेयर किया बहुत ही बहुत इम्पोर्टेंट है यह हमारे लिए समझना की लाइफस्टाइल मैनेजमेंट ये अगर हम नहीं करेंगे तो गोलियां खानी पड़ेगी और अगर गोली नहीं खानी है मेडिसिन फ्री जीना है तो 1 डिसिप्लिन में मेंटेन करना पड़ेगा, नींद पर ध्यान देना पड़ेगा, स्ट्रेस फ्री रहना पड़ेगा, अच्छा खाना खाना पड़ेगा और हर वो चीज करना पड़ेगा जो हमारे दादा दादी हमें कहा करते थे बिकौज उसके पीछे 1 कारण है मैं
1 बात और कहना चाहता हूँ चलते चलते है हमेशा उसे समझना चाहिए कि रोगी के लिए शरिया है दवाइयाँ केवल रोगी व्यक्ति के लिए है और स्वस्थ व्यक्ति को अपना स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए आहार है भोजन सबसे महत्वपूर्ण है क्या खाएं, कब खाएं, कैसे खाएं, कितना खाएं और कैसे पकाएं ये 5 सवाल है जो भोजन के सम्बन्ध में हमको खुद से करने चाहिए तो हम ठीक प्रकार से अच्छा भोजन ले पाएंगे अच्छा भोजन ही अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है दवाएं केवल आवश्यकता पड़ने पर दी जाती है और दवाओं की आवश्यकता न पड़े यह हमें प्रयास करते रहना चाहिए और
अगर नहीं पता की किस टाइप का भोजन और किस टाइम पर करना है तो 1 ऐसे व्यक्ति से बात करे जिसे इस बारे में पता है उनसे 1 प्रॉपर अपना चार्ट बनवाए, अपना खाना कब क्या खाना है उनसे जानकारी ले और उसको फॉलो करे थैंक यू डॉक्टर थैंक यू सो मच फोर कमिंग एंड शेयरिंग दिस इनसाइट आज बहुत इमपोर्ट टॉपिक पर हमने डिस्कस किया लोग जो भूल जा रहे हैं हमारे पुराने वेद पुराण को और हमारे पुराने प्रैक्टिसेज को और जो ये वेस्टनाइजेशन हो रहा है हमारा जिसमें हम लोग हर वक्त स्क्रीन पर रहते हैं नींद पर ध्यान नहीं दे रहे हैं हर वक्त कॉन्टेंट के ऊपर हमारा फोकस रहता है जिसकी वजह से स्ट्रेस बहुत बढ़ जाता है बहुत जरुरी है ऐसे कॉन्वरसेशन को करना ताकि लोगों को अवेयरनेस आये की वो किस तरह से हमें रोगी बना रहा है तो यही 1 कॉन्वरसेशन मैं चाहती हूँ कि वीरा इस बैलेंस पोडकास्ट के थ्रू सबकी तरफ जाए लोक समझे इस बैलेंस के बारे में इस प्रैक्टिसेस को अपनी लाइफ में अच्छे से प्रॉपरली इंवाइब करे सो थैंक यू वन्स अगेन वेरी वेरी वो हम्बल and kind you know feedback from our site that this was very very ansiteful thank you thank you or।
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