Nitu Mohanka explores how negative self-talk drives overthinking and stress. We have roughly 35,000 thoughts daily, most of them internal conversations with ourselves. The video shows how to distinguish between useful critical thinking and harmful rumination, with techniques to quiet the noise.
क्यों होता है ये नेगेटिव सेल्फ टॉक एंड कैसे इससे बाहर आये क्योंकि ई थिंक दैट s आलसो अ वेरी बिग कॉज ऑफ स्ट्रेस
जो मैंने बताया था कम्युनिकेशन लेवल वन यू कम्युनिकेट विथ योर। मुझे ये बताओ कि आप दिन में सबसे ज्यादा कम्युनिकेशन किसके साथ करते हो, आपके कॉलेज से, आपके, हसबेंड से, आपके, बच्चे से,
खुद से,
खुद से एप्सोलूटली राइट, हम दिन में सबसे ज्यादा कम्यूनिकेशन अपने साथ करते हैं और एप्रोक्सिमेट थर्टी फाइव थाउजेंड थॉर्ट्स पर डे हमें आते हैं दूसरा जो मैंने बताया था कि 1 तो सेल्फ टॉक नेचरली बायस होती है नेगेटिव टेशन और इतने सारे जो थार्ट्स आरहे हैं। आप जो नेगेटिव सेल्फ टॉक की बात करे मैं उससे भी ऊपर जाता हूं जो उसके बाद का रिजल्ट आता है वो है जिससे बहुत से ज्यादा लोग जूझ रहे हैं। तो जब हमें बार बार ये थाट्स आ रहे हैं और नेगेटिव आ रहे हैं सेल्फ टॉक और हमने कभी सीखा नहीं है कि हमारे अपने साथ कैसे कम्युनिकेशन करना है ये थौर्ट जब बार बार आते हैं और आप उसके ऊपर एक्शन नहीं लेते वो बन जाता है ओवर थिंद डिफरेंस बिटवीन क्रिटिकल थिंकिंग एंड ओवर थिंकिंग मतलब ये सेल्फ टॉक जैसे आपको आ रहा है कि मुझे ये काम करना है लेकिन अगर मैं फेल हो गया तो अच्छे से नहीं किया तो परफेक्ट करना है मुझे मैं परफेक्ट नहीं कर पाया तो यह नेगेटिव टॉक सेल्फ टॉक, बार बार आ रहा है, बार बार आ रहा है और फिर क्या करते है प्रोकास्टिनेशन।