Nitu Mohanka discusses why people seek coaching: frustration, poor work-life balance, and job pressure create uncertainty about finances and relationships. Coaching helps by improving performance and temperament, offering the stability people really want.
Chapters
तो अगर सपोज कीजिए की वर्क बैक करें कि आपके पास कोई बंदा आया उसको 1 पर्टिकुलर आउटकम मिला वाट, विल बी, दैट आउटकम एंड वो किस सिचुएशन में आपके पास आते हैं, विच लीड, देम टू आउटकम थ्रू कोचिंग
मेन ली, आउटकम्स उनके यही होते हैं। जब आते हैं तो दे फील फ्रस्टेशन या तो वर्क लाइफ बैलेंस नहीं होता है। यह वर्ग में बहुत प्रेशर होता है। यह देयर ऑन द वर्क ऑफ के भैया। अभी अगर परफॉर्मेंस इम्प्रूव नहीं किया या टेम्परामेंट इम्प्रूव नहीं किया तो नौकरी चली जाएगी। सो बेसिकली देर वान्टेड, स्टेबिलिटी, दैट्स वाई, दे कम, आउट कम, स्टेबिलिटी एन, आउट कम। उनके पास होता क्या है? अनसर्टेनिटी के 3 महीने बाद होने वाला क्या है, जॉब में क्या होने वाला है, मेरे फाइनेंस में क्या होने वाला है, मेरे रिलेशनशिप में क्या होने वाला है, सो दे आर सराउंडेड बाई अनसर्टेनिटी एंड aniजiनेस, दे कम for coaching to six crtenitistेbility दिस कोचिंग जर्नी स्टार्ट।