Nitu Mohanka explores how daily routines like waking, commuting, and work are patterns formed in childhood, not real choices. We rarely question them because the mind resists change and society reinforces them as the right way to live.
Chapters
राइट क्या होता है मन दिन लाइफ 1 नार्मल ह्यूमन का सुबह उठे वी आर आलवेज इन हरी राईट फटाफट करो बच्चे को तैयार करना है, स्कूल जाना है, ऑफिस में लेट बॉस का कॉन कॉल है तो वी आर सो मनडिनइनअवररूटीन पैटन की वो थोड़ा हट के अपना सोचना नहीं चाहते, वो पैटन ब्रेक करना ही नहीं चाहते हैं।
बचपन में सिखाया भी नहीं गया,
ये
बचपन में बोल दिया। अरे हट तो बेवकूफ है, हां पागल है, आई थिंक वो कैरी करते जाते हैं एंड पीपल स्टार्ट, डीवालुइंग them सेल्स, i, m, नो, दैट इमपोर्टंट, इनवेस्टिंग इन, समथिंग, आउटसाइड ऑफ, मी, इज, मोर इम्पोर्टेंट।
ये तो वो पैटन में फंसे हुए हैं और पैटन ब्रेक करना इतना ईजी नहीं है। राइट अपन अगर घर से ऑफिस जा रहे हैं तो 3 रास्ते हैं तो नाइनटी नाइन, परसेंट टाइम, वी, आलवेज, सीफर, वन रोड,
ओनली,
बिकॉज इट, इज, पैटन, घर आ के अगर मनडे, ये सब्जी रोटी है तो ये सब्जी रोटी बनेगी मोस्ट ऑफ द हाउसहोल्ड में ऐसा बिकज इट, इज पैटन ऑफ हाउस ोल के मंडे टू हाइडे, क्या खाना बनाना है वी आर प्रोडक्ट ऑफ पैटन।