Nitu Mohanka explains how coaching differs from teaching or motivation. A coach helps you separate emotion from logic, see your reality clearly, and build a concrete vision for the future, especially after injury or setback.
ten people start serching what is my clarity for life so for clarity you now सी कोचिंग किसी के ड्रामाज होते हैं, क्लैरिटी नहीं मिल रही है, दे डोंट नो they are not able to सी फ्यूचर कलिarरली एंड सो दे कम तो कोच तो फाइन क्लैरिटी
यह यह तो आप कैसे देते हो उनको क्लैरिटी एंड क्यूँ मतलब नीड क्यों है क्लैरिटी के इतना पढ़ने लिखने के बाद, इतना काम करने के बाद एट दिस इज आलसो क्लैरिटी नीड क्यों आती है
दैट इज नीतू कोचिंग डिफ्रेंशिएट करता है टीचर्स या मोटिवेटर से राइट टीचर क्या करता है कि जो सिलेबस है वो पढ़ाता है आपको मोटीवेटर इट विल यू नो पम्प यू विद ऑल स्टोरीज इसने ये किया उसने वो किया, बट उसमें कोच का रोल क्या है कोच आपको डिस सोसिएट करता है आपकी रियलिटी से राइट वो इमोशंस को सेपरेट करता है लॉजिक से।