Are you #perfect? क्या आप perfect हैं?

Cricket legends like Sachin Tendulkar and MS Dhoni made imperfect shots but changed the game anyway. Waiting for perfection stops you from creating. Start now, accept the flaws, and focus on helping even one person with your work.
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सो फ्रेंड्स, हाय कैसे हो, है क्चयाली और बाल was और कुछ थोड़ा सा बिखरा हुआ है। ac्चलीहाहैकीथोडा सा कुछ परफेक्ट होना चाहिए था, ोडाजरु आपको लग रहा है, इसे बहुत लोगों को लगता है, हम बोलते हैं की ये परफेक्ट चाहिए, यह सुपर चाहिए और यह एकदम वैसे वैसे होना चाहिए। ऐसे हमारे दिमाग में कब से बड़ा हुआ है क्या परफेक्शन नाम की चीज इस दुनिया में है, चलो ये वीडियो देखते हैं आगे कुछ, लेकिन आपको मैं याद दिलाना चाहता हूँ कि यह वीडियो शेयर करना मत भूलना, सब्स्क्राइब करना मत भूलना और लाइक करना मत भूलना। अगर आपको वीडियो अच्छा लगे और मुझे लगता है। आपको यह वीडियो अच्छा लगा तो मैं बोल रहा था। परफेक्शन की बात। अभी 1 बात बताओ कितनी बार ऐसा होता है कि हम मैच देखने जाते हैं, यह मैच टीवी पर देखते हैं और हमारे फेवरेट प्लेयर आ जाते हैं, जैसे कि सौरभ गांगुली है, धोनी है, सचिन तेंदुलकर है और वो खेल रहा है, हम खेलते खेलते देख रहे हैं की 1 बॉल आ रहा है, बॉलर डाल रहा है, सचिन तेंदुलकर। 1 दम तैयारी में है। आप इंतज़ार कर रहे हो की वो फोर मारेगा या सिक्स मारेगा और वो सचिन बैट लेकर खड़ा हो जाता है और उसी वक्त वह जहा से 1 सिम्पल प्ले करता है या ऐसी बॉल छोड़ देता है। आप बोलते है अरे यार क्या यार सचिन, क्यों ऐसा कर रहा है, दूसरी बार ऐसे होता, तीसरी बार होता है, चौथी बार वो बॉल मारता है और वो फोर जाता है, बॉन्ड जाती है और आप बोलते है यह सचिन दास सम, लेकिन वो 4 बार वो जो परफेक्शन नहीं था, 4 बार वो फेल हो रहा था, 4 बार वो ऐसे बोल रहा है, अपने दिमाग में तो था ही, यह बैठ ऐसा मारेगा तो अच्छा रहेगा। हम तो ऐसे ही बोल देते कि अरे यार वो जो बॉल है न वो उसने ऐसा खेलना चाहिए था, लेकिन उसने खेला नहीं लेकिन चौथी बार उसने फोर मारा या पांचवी बार उसने शायद सिक्स मारा, उस वक्त हम भूल जाते है की उसने क्या गलतियां की है लेकिन इसी वक्त यह सब गलतियाँ हम माफ कर लेते है क्यों की उसके बाद वह सेंचुरी मारता है या शायद भारत के लिए वो ट्राफी लेकर आता है, भारत को जीता लेता है लेकिन इसी वक्त हम अपने बारे में क्या सोचते हैं। ऐसा होता है कि हम बोलते हैं कि मुझे कुछ करना है लेकिन शायद परफेक्ट नहीं है, तब तक मैं नहीं करूंगा। अभी 1 बात बताओ कि दुनिया में ऐसा कोई परफेक्ट इंसान है या ऐसे सबसे परफेक्ट ब्यूटिफुल गर्ल पूरी दुनिया में या आप ये देखो की ब्यूटिफुल लड़की जो आपको अच्छी लगे या ब्यूटिफुल पर्सन जो भी अच्छा लगे उसके ऐक्चवली सिमेट्री है, क्या उसके फेस में कोई सिमेट्री है? क्या आपको? कहीं आपको सिमेट्री दिखेगी लेकिन आपको वो लड़का या लड़की रियल में अट्रैक्टिव लगेगी, सुंदर लगेगी। ऐसा क्यों होता है इसका मतलब परफेक्ट ने बेहतरीन ऐसा हम बोल ही नहीं सकते। अभी और 1 चीज बताओ सबसे सुपर पावर जिसे बोलते हैं, सबसे सुप्रीम जिसे बोलते हैं, वो गॉड क्या उसे हम परफेक्ट बोल सकते हैं। अगर हम गार्ड को क्रिएटर बोलते है तो उसने क्रिएट किया है इस दुनिया को? इस दुनिया में ऐसी कौन सी चीज है जो एकदम परफेक्ट है ऐसी क्या चीज है जैसे की हर 1 आदमी को कुछ न कुछ दुख और दर्द है। हर 1 आदमी अलग अलग दिखता है, कोई गोरा है, कोई काला है, कोई गंजा है, मेरे जैसा या ऐसी बहुत सारी चीजें। लेकिन 1 बात बताओ क्या? अगर गार्ड अगर सुप्रीम है, अगर उसको परफेक्ट ही बनाना था तो वो बोलता था। अरे सबको हम सुंदर बना देते हैं, एकदम मस्त बनाते है, एकदम सब की परफेक्ट बॉडी रहेगी, हर 1 के पास ऐसा शेप रहेगा, एकदम सब जैसे दिखेंगे, वैसे एकदम सुपर दिखेंगे, लेकिन उसने ऐसा किया नहीं। या अगर आप एनिमल्स को देखो, दुनिया में जो पेड़ है उसकी तरफ भी देखो इसका मतलब ये रचना जो बनाई है वही इम्परफेक्ट है क्योंकि इमपरफेक्ट में इससे ही हम ढूंढने जाते हैं परफेक्शन को और जब ढूंढने लगते हैं तब हमें पता चलता है कि परफेक्शन इज नौट हैप्पीनेस, हैप्पीनेस कुछ अलग है। तो अभी यह सब मैं क्यों बता रहा हूँ। क्योंकि बहुत बार ऐसे होता है हम कुछ चीज करना चाहते हैं जैसे किसी के पास 1 पैशन है, कोई म्यूजिक बनाना चाहता है, कोई गाना चाहता है, कोई डांस करना चाहता है, या कोई यूट्यूब वीडियो बनाना चाहता है, या कोई पोडकास्ट करना चाहता है, ब्लॉग लिखना चाहता है, लेकिन उसमें परफेक्शन नहीं आता है, इसके लिए रुक जाता है। लेकिन अब मुझे बताओ ऐसा कौन सा परफेक्शन तक आप वेट करोगे कि जिसको बोले की ये वीडियो है, परफेक्ट है। जैसे की मेरी कोई यू ट्यूब वीडियो है, ऐसा मुझे चैलेंज दे के बताओ कि ये वीडिओ एकदम परफेक्ट है या दुनिया में जो भी आपको यूट्यूब वीडियो अच्छा लगा, वो बोला की इसमें कोई खामिया नहीं है, एकदम परफेक्ट वीडियो है ऐसा हो ही नहीं सकता। यहाँ कोई भी बड़ा आदमी देखो जिसकी स्पीच है या कोई बोल रहा है, उसमें बोलो की ये परफेक्ट है या कोई सिंगर है जिसका गाना आप सुन रहे हो, जो बहुत आपको अच्छा लगे। लेकिन बताओ की ये एकदम हंड्रेड परसेंट परफेक्ट है, नहीं है। तो अगर आप इधर भी रुक रहे हो, कोई भी चीज में आप अटक रहे हो, या जो भी आप कुछ चीज करना चाहते हैं उससे शुरुआत करो। जैसे अगर आपको यूट्यूब वीडियो शुरू करना है, प्लीज शुरू करो, पोडकास्ट शुरू करना है, प्लीज शुरू करो, अगर आपको कुछ सीखना है, नया चीजें सीखनी है तो आप प्लीज शुरू करो क्योंकि उसमें परफेक्शन ढूंढने जाओगे न तो कुछ नहीं मिलेगा, लेकिन आप अगर सीखना शुरू करोगे और 1 टारगेट रखे की मुझे इस लेवल तक जाना है तो आपकी क्रिएटिविटी बढ़ेगी और बहुत सारे आइडियाज आयेंगे और शायद ये हो सकता है कि लोग आपको प्यार करने लगेंगे। वो यह नहीं सोचे की ये आदमी परफेक्ट है की नहीं, यह नहीं सोचे की इसमें कितना परफेक्शन है, वो ये सोचेंगे जो भी कुछ कर रहे हैं हमें अच्छा लग रहा है शायद आप कुछ कॉमेडी कर रहे हो, कुछ लोगो को अच्छा लगे, कुछ लोगों को अच्छा नहीं लगे लेकिन जो हंस रहे हैं उनके लिए आप फंसा रहे हो। आप बहुत कुछ अच्छा काम कर रहे हो। अगर आपके कोई भी चीज से आपके कोई भी एक्शन से दूसरे को अगर खुशी मिल रही है तो मैं बोल रहा हूँ प्लीज करो अगर सौ में से 1 आदमी का लाइफ आपकी वजह से चेंज हो रहा है। भले आपका कोई 1 फोटोग्राफ है जिसकी वजह से उसके चेहरे पर स्माइल आ रही है या आपका कोई पेंटिंग है जो किसी को अच्छा लगा और बोला क्या बनाया है या कोई 1 ऐसा सेंटेंस या कोई 1 ऐसी पोयम जो किसी के दिल को छू जाए और उसकी लाइफ में कुछ बदलाव आ जाए तो प्लीज ये चीजें करो, परफेक्शन का इंतजार मत करो तो वापस में बोल रहा हूँ मेरे परफेक्शन को मत देखना। ये सभी चीजें ऐसी ही रहती हैं। अगर मैं अभी नमस्कार कर रहा हूं वो भी शायद परफेक्ट नमस्कार नहीं होगा फिर भी आप ये वीडियो देख रहे हैं। सो थैंक यू सो मच, फॉर वाचिंग माई, वीडियो मैं, वापस आपको मिलने। आऊँगा कोई ऐसे ही सब्जेक्ट के ऊपर बात करने के लिए थैंक यू सो मच।










