Why can't I #sleep at night

Sushil explains how hypnosis can treat chronic insomnia by erasing negative patterns stored in your subconscious mind. Daily stress like news about accidents and job anxiety accumulates as mental clutter, triggering sleep problems and irritability. Hypnosis works like deleting unwanted files from a computer to restore calm and better sleep.
Chapters
नमस्ते दोस्तों, मैं हूँ सुशील और आज हम वापस आये हैं 1 ऐसे टॉपिक के बारे में सुनने के लिए जो आपने लास्ट टाइम सुना था हिपनोटिजम। 1 बहुत ही सरल शास्त्र जिसके बारे में आज आप फिर से कुछ जानेंगे। हिपनोटिजम की मदद से आपके लाइफ में से बहुत सारे प्रॉब्लम आप सॉल्व कर सकते हो। 1 अच्छा हिप्नोटिस्ट आपके ये सब प्रॉब्लम आपके दिमाग से निकाल सकता है। मेजोरिटी ऑफ प्रोब्लेम्स जो हम देखते हैं, मैं तो बोलता हूं नाइंटी परसेंट प्रॉब्लमस साइकोलॉजिकल रहते हैं जो आपके सबकॉंशस माइंड के अंदर घुसे हुए रहते हैं। हमें ऐसा लगता है कि यह प्रॉब्लेम्स प्रोब्लेम्स है। नहीं, यह शायद ऐसा लगता है कि हर 1 को प्रॉब्लम है। लेकिन ऐसा नहीं है। शायद आपने अगर ठीक से एनालाइज किया होगा तो आपको पता चलेगा कि ये प्रॉब्लम रियल में प्रॉब्लम है और ये प्रोब्लम निकालने के बाद आपकी लाइफ में हैप्पिनेस। हैप्पिनेस रहेगा। बहुत अच्छी तरह से आप जिंदगी जी सकते हैं। तो ये प्रॉब्लम कौन कौन से हो सकते हैं। सबसे बड़ा प्रॉब्लम, सबसे बड़ा प्रॉब्लम वो है, नींद नहीं आना। बहुत सारे लोगों को इंसोमिया की बीमारी रहती है और लोग खुले दिल से बोलते हैं कि मुझे इंसोमिया है। रात को वो 10 बजे, 11 बजे, 12 बजे सोने की कोशिश करते हैं, या शायद वाट्सएप में रहते हैं, मोबाइल में घुसे रहते हैं या कोई किताब पढ़ने की कोशिश करते है लेकिन नींद नहीं आती। या रात को 11 बजे उठ के बोलते है। चलो मूवी देखता हूँ, शायद नींद आ जाएगी या कुछ पेपर पढ़ता हूँ नींद आ जाएगी या गाना सुनता हूँ नींद आएगी। ये सब करने के बाद भी आपको नींद नहीं आती। आप 1 बजे तक भी जागते रहते हो, 2 बजे तक जागते रहते हो। 3 बजे ऐसा कुछ लगता है की मुझे नींद आ गई। 6 या 7 बजे। आपको लगता है कि मेरी नींद शायद हुई है, लेकिन अच्छा नहीं लग रहा है। ऐसा लग रहा है की थोड़ी अधूरी नींद हो गई। सा लगता है कि शायद नींद हुई? नहीं, न कुछ बुरे सपने न अच्छे सपने। ये होती है नींद की बीमारी और डेफिनेटली। उसका असर पड़ता है। आपके पूरे दिन पर व्यवहार पे आप चिचिड़ापन महसूस करते हैं। अगर आप जॉब पे हो या बिजनेस कर रहे हो, आपको ऐसा लगता है कि आपको सोना है। वैसे भी आपको नींद आती नहीं है। आप सोने की भी कोशिश करते हो। आप शायद चेयर पर बैठ जाओगे, नींद लेने की कोशिश करोगे, लेकिन आपको नींद आती नहीं है। कुछ लोगों को ऐसे भी इस में यह होता है कि उनको रात को सोते। वक्त ऐसे डर लगता है कि मैं शायद मर जाऊं। मेरी सांस अटक रही है। ऐसे भी होता है। ये छोटी सी बीमारी है, दिमाग की बीमारी है और इसको साल कर सकते हैं। हिपनोटिजम की मदद से आपकी ये बीमारी डेफिनिटली साल हो सकती है। बस आपका वो सहयोग चाहिए। हिपनोटिस्ट अगर आपके आसपास है तो उसको बोलिए कि यह मुझे रिजॉल् करना है। दूसरी बहुत इम्पोर्टेंट चीज है कि स्ट्रेस हम दिन भर में कितनी बार कुछ ऐसी चीजों का स्ट्रेस लेते हैं। उस चीज का स्ट्रेस आपको लेने की जरूरत ही नहीं रहती। जैसे की आपने पेपर पढ़ लिया, पेपर में आपने पढ़ा कि एक्सिडेंट हो गया, 1 नौजवान लड़का कार से टुकरा कर मर गया। अभी ये न्यूज आपने पढ़ी वो लड़का और आपका कोई सम्बंध है। लेकिन आपके इमोशंस उसके साथ अटैच हो जाते है। डेफिनिटली अहम यूमन विंग है, इमोशंस चाहिए। लेकिन उसका असर आपके दिमाग में रहता है कि अगर आप रास्ते पर चल रहे हो, गाड़ी चला रहे हो तो आप वही दिमाग में रहेंगे कि शायद मेरे हाथ से कोई एक्सीडेंट न हो जाए। डेफिनेटली आपको कांशेस रह के गाड़ी चलाना है। लेकिन ये दिमाग में नहीं रहना चाहिए कि यह एक्सीडेंट मेरे साथ भी हो सकता है। यह हम आपके बच्चों की फिक्र करने लगते है। ज्यादा फिक्र करने लगते है की बच्चे जरा संभाल के चलाना, संभाल के चलना, शायद कोई गाड़ी आपको ठोकने जाए। इसका स्ट्रेस आप ले के चलते है। यह शायद आप यह भी सुनते हैं कि 1 जगह आग लग गई है। हमें उसका स्ट्रेस आ जाते है की शायद मेरे ऑफिस में आग न लग जाए, मेरे यहाँ सिलेंडर का परोजन न हो जाए। ऐसे बहुत सारे स्ट्रेस जिसका से सम्बंध नहीं है, लेकिन हम उस ट्रे को लेते रहते हैं। यह शायद आपको किसी इंटरव्यू में जाना है। इंटरव्यू जाने से पहले आपको ये मालूम है कि चलो मैं जॉब पर अप्लाई कर रहा हूं। आप बहुत जोर शोर से तैयारी करते हैं, बहुत जगह अप्लाई करते है। अप्लाई करने के बाद आप खुशी से पागल हो जाते है। चलो मुझे किधर से कॉल आ गया। लेकिन कॉल आने के बाद जब इंटरव्यू देने की बारी आती है तब आपको वो स्ट्रेस महसूस होता है। हमें लगता है कि शायद वो जॉब पर लेंगे की नहीं इंटरव्यू कैसे जाएगा। शायद मेरी पर्सनालिटी में प्रॉब्लम है, शायद मेरा चेहरा ठीक नहीं है, या शायद मेरे बोलने का ढंग काफी नहीं है। या शायद मेरा एक्सपीरेंस कम पड़ेगा। ये सब स्ट्रेस पहले नहीं आ रहा था। लेकिन इंटरव्यू की घड़ी नजदीक आ रही थी। तब वो आ गया। अभी ऐसे कितने प्रकार के स्ट्रेस आप दिन भर में लेकर घूमते हैं और इसका असर आपकी बॉडी पर पड़ता है। इससे अलग अलग बीमारी भी हो सकती है। सबसे बड़ी बीमारी में आपको बोला कि नींद न आना आप रात को स्ट्रेस लेके रहेंगे तो डेफिनिटली दूसरे दिन तक आप फ्रेश नहीं रहेंगे। उसके बाद आप इंटरव्यू जायेंगे तो डेफिनिटली उसका इफेक्ट आपके इंटर्वू में आएगा ही और जो होना था वो होने ही वाला है तो उसका स्ट्रेस आप क्यों ले। लेकिन उसके लिए भी आप सेल्फ फना सिस करके भी आप वो स्ट्रेस को निकाल सकते हो। या तो थ्री उतना सिस आप उस ड्रेस को जो आपकी आदत बन गई है, उस आदत को आप निकाल सकते हो। तीसरी चीज है कि किसी को नींद में चलने की आदत रहती है या नींद में बोलने की आदत रहती है। यह भी मानसिक बीमारी है और इसको भी आप निकाल सकते है। चौथी चीज है स्टैमरिंग किसी को हकलाने की आदत रहती है। कई बार ऐसा होता है कि बचपन में बच्चा क्या करता है कि कोई हकला रहा है तो उसकी नकल करने की कोशिश करते, वो, नकल करते करते, उसकी भी वो आदत हो जाते है तो कुछ वर्ड वो भूल जाता है और उसके बाद लोग भी उसकी तरफ देख के पहले बच्चा है तो उसकी तरफ देखते कि हा बच्चा नकल कर रहा है उससे हंसते लेकिन धीरे धीरे उस बच्चे की आदत बन जाते। जब बच्चा बड़ा हो जाता है तब लोग हंसने लगते है की भाई तो हकला रहा है, डेफिनेटली उसका असर तो पड़ता है, क्यूंकि आप बिजनेस में या कोई इंटरव्यू में या इधर भी किसी के साथ बात कर हे हैं तो इम्प्रेशन ठीक नहीं होता, आप किसी के साथ बात करेंगे और आप रुक जायेंगे उसे लगा की यह क्या है, इरिटेट कर रहा है और इसका असर आपके ऊपर वापस गिर सकता है और आप डिप्रेशन में चले जाते हो, इनेटकॉम्पलेक् बढ़ जाता है। मैं बोलता हूँ की ये भी छोटी सी बीमारी है, छोटा सा मानसिक प्रॉब्लम है या आप निकाल सकते हो। इस सिम्पल सायंस, ये सब आपके सब कांशेस में बैठी हुई चीजें हैं, हिपनॉसिस से इस सब कचरे को निकाल सकते हैं और 1 इम्पोर्टेंट चीज है। हम पूरे दिन निगेटिव सोचते रहते है, हर 1 चीज आपके साथ होती है, हम बोलते हैं की इसका कुछ असर हो गया, कुछ भी हो गया। हम बोलते हैं अरे अभी कुछ गलत होने वाला है, जैसे की दूध उबल रहा है और अचानक दूध उबलते हैं, आपका ध्यान नहीं देता, दूध वेस्ट हो गया और आप बोलते है। अरे आज कुछ बुरा होने वाला है यह किसने बताया किसी ने तो बताया की ऐसा होता है तो आपके हाथ में ऐसी कुछ गिर गया। उसी वक्त शायद यह भी हो सकता है की 1 ही दिन यह सब चीजे हो जाए। जैसे की दूध उबल गया, दूध खराब हो गया और उसके साथ साथ आपके हाथ से कोई कब गिर गया। अभी आप सोचेंगे अरे ये तो और बुरा हो गया तो पूरा दिन खराब हो जायेगा, आज का दिन खराब है। इसी तरह आप सबकॉंशस माइंड को ऐसे गलत गलत सजेशन देते जाते हो और पूरा दिन आप अपने हाथ से खराब करते हो। इसलिए ऐसे कहते जैसे सोचेंगे वैसे होगा क्योंकि आपने बोला दिन को खराब जाने। 2 ये चीजें निगेटिविटी की तरफ लेके जाती है और ये निगेटिविटी जैसे जैसे आप बचपन से बड़े होते जाओगे वैसे वैसे निगेटिविटी बढ़ती जाएगी और धीरे धीरे उसकी आदत हो जाएगी। तब जब भी कुछ निगेटिव चीजें होगी आपके साथ आप और निगेटिव होते जाएंगे। ये निगेटिविटी आपके दिमाग से पूरी तरह से निकाल सकती है। उसके लिए यही करना है कि ये निगेटिविटी सबकॉंशस माइंड से निकालनी है। जैसे आप इरेज करते हैं आपके कंप्यूटर्स में, आपके हादिस में बहुत सारे ऐसे ओल्ड फोटोज रहते हैं जिसको आप डिलीट करना रहता है जिसका कुछ यूज नहीं होता या ऐसे भी कुछ डॉक्यूमेंट्स रहते है जिसका अभी आपको यूज नहीं है। घर में कचरा रहता है जिसका आप भी यूज करना नहीं चाहते। ये कचरे को जैसे आप निकाल कर फेंकते हैं क्यूंकि इसका जरूरत नहीं रहता। उसी तरह आपके दिमाग में से ये सब प्रम फेंक सकते हैं। फेकने के लिए आपको बस इतना ही है सब कांशेस माइंड से निकालने के लिए हिपनोसिस सीज वन ऑफ द बेस्ट टेक्निक। तो दोस्तों ये और ऐसे बहुत सारे मानसिक बीमारियां आप हिपनोसिस से निकाल सकते हैं। हिपनोसिस के बारे में और भी बहुत जानकारी आपको धीरे धीरे मैं बताता जाऊंगा हिपनोसिस आपके लिए और क्या पॉजिटिव चीजें कर सकता है ये मैं आपको बताऊंगा और तब तक आप देखते रहिये और आपको कोई डाउट है आपको कुछ पूछना है तो आप नीचे दिए हुए कमेंट में आप डाल सकते हो मैं डेफिनिटली आपको रिप्लाय दूंगा थैंक यू।










