Unlock Confidence and Success with Guided Affirmations (Hindi) | Transformational | Salila Ayurveda

The video is a Hindi‑language guided meditation led by Salila, an Ayurveda health coach. It begins with an invitation to find a quiet, comfortable place, turn off distractions, and settle into a relaxed posture. The speaker walks the listener through deep breathing cycles, encouraging the release of tension in the body and mind. The core of the practice centers on focusing attention on the third‑eye (trinetra) point between the eyebrows, visualizing a subtle beam of light that may appear in various colors or as a golden glow. Listeners are guided to expand this light, assign it a preferred color and temperature, and bathe the whole body in its soothing radiance. Throughout the session, affirmations are repeated, expressing gratitude to the divine, declaring alignment with the divine (Parmatma), and affirming success, love, health, prosperity, and spiritual growth. The meditation also includes instructions for handling wandering thoughts, using the breath and body sensations as anchors, and ending with gentle physical movements, hand‑rubbing, stretching, and a closing “Om Shanti” chant. The content blends breathwork, visualization, mantra‑like affirmations, and Ayurvedic‑spiritual philosophy to reduce stress, improve sleep, and foster confidence and inner peace.
Chapters
हरि ओम तत्सत। मैं आपको 1 खास ध्यान की गाइडेंस देने जा रही हूं। इस ध्यान से अपना सिर्फ अपने दिन भर के तनाव से मुक्त हो जाएंगे। बल्कि आप गहरी नींद सोकर। जब उठेंगे तो अपने स सभी रिश्तों में 1 नया मिठास पाएंगे। आप महसूस करेंगे कि जैसे जैसे आप ये गाइडेड मेडिटेशन सुनते जाएंगे, गुस्सा, दुख, एशिया जैसे कष्ट देने वाले भाव आप कम महसूस करने लगेंगे। आप न दूसरों को दुख देंगे और न ही दूसरे आप पर आसानी से हावी हो पाएंगे। आप सफलता प्राप्त करने लगेंगे, आपकी इच्छाएं पूर्ण होने लगेंगी, आकस्मिक लाभ होने लगेगा, पशु पक्षी आपसे आकर्षित होंगे, जीवन फिर से सुगम होने लगेगा, चलिए ध्यान लगाएं आराम से 1 ऐसी जगह पर बैठ जाएं या लेट जाएं जहाँ आप शांति के साथ ध्यान लगा सकते हैं। अपने फोन, उपकरणों एवं नोटिफिकेशन को बंद कर दें। कंफर्टेबल हो जाए, रिलैक्स हो जाएं, मेरी गाइडेंस को सुनते रहें और फॉलो करते रहें। अब 1 गहरी सांस अंदर लें और बाहर छोड़ दें। अगर आपके मन में तरह तरह के ख्याल आने लगे, तो चिंता न करें। मेरी आवाज के सहारे दोबारा ध्यान में प्रवेश करें। सबसे पहले अपने अंदर बसे परमात्मा को धन्यवाद दें कि आपने अपने व्यस्त जीवन के बावजूद परमात्मा को स्पर्श करने के लिए समय निकाला। गहरी। सांस अंदर लीजिए और रिलैक्स होकर छोड़ दीजिए। 1 बार और गहरा श्वास लीजिए। अपने अंदर कुछ पल के लिए उसे होल्ड कीजिए और फिर छोड़ दीजिए। श्वास लेते और छोडते वक्त कहीं पर भी कोई भी तनाव या रुकाव नहीं होना चाहिए। यदि आप शरीर में तनाव महसूस करते हैं, तो उन मांसपेशियों को प्रेम पूर्वक रिलैक्स होने का निर्देश दें। श्वास बिल्कुल उतनी ही आसानी से लें, जैसे कि सागर में लहरें आसानी से तट का कर छूती हैं और निकल जाती हैं। अब अपने ध्यान को चारों तरफ की आवाजों से हटाते हुए पहले अपने शरीर पर, फिर श्वास पर और फिर अपनी तीसरी आंख पर केंद्रित करें। आँखों को हल्के से बंद करें और भृकुटियों के बीच के स्थान पर दृष्टि रखें। हमारी तीसरी आंख भ्ृकटियों के बीच नासिका के अग्र पर होती है। जब आपकी नजर तृणेत्रपर सही ढंग से केंद्रित होती है, तो आपका माथा आपकी, आँखें, आपका, चेहरा, बिल्कुल तनाव से मुक्त होता है, आपका श्वास रेगुलर होता है। जब भी आपका ध्यान हट जाता है, तो इस खास सीक्वेंस को याद कर लें। आसपास की आवाजें, शरीर की अनुभूतियां श्वास का अंदर बाहर आना जाना और फिर ध्यान को तीसरी आंख पर केंद्रित कर लें। यदि आपने पहले कभी तृणेत्र पर ध्यान नहीं किया, तो आप कुछ ही महीनों के अभ्यास के साथ अपने तिनेत्र पर 1 प्रकाश की सुक्ष्म किरण को पाएंगे। यह किरण कई बार रंग बिरंगी दिख सकती है और कई बार 1 धुंधली सी स्वर्णिम रौशनी की तरह बंद आँखों के पीछे दिखाई पड़ सकती है। इस रोशनी को अपने ध्यान का केंद्र बनाएं और अगर आपका ध्यान हट जाता है, जो कि स्वाभाविक है, तो बिना निराश हुए, बिना क्लेश करें। अपने ध्यान को पहले अपने आसपास के वस्तुओं की आवाजों पर, फिर अपने शरीर पर, फिर अपनी श्वास पर और अंत में अपने तरणेतर पर फिर से केंद्रित करें। आप जितनी बार केंद्रित करने का अभ्यास करेंगे, आपका ध्यान उतना ही इस चैतन्य के द्वार पर निश्चल रहेगा। चैतन्य का यह द्वार परमात्मा का द्वार है। इन शब्दों की गहराई समझें, गहरी सांस लें और छोड़ दें। इस चैतन्य के बिंदु से हम परमात्मा के असीम प्रेम, शांति और शक्ति से अपने कण कण को सिंचित कर सकते हैं। यह शांति का सागर हमारे लिए हमेशा उपलब्ध है। इसे कोई हमसे अलग नहीं कर सकता। हमारे बुरे संस्कार भी इस रौशनी से हमें वंचित नहीं रख सकते। परमात्मा का प्रेम हमें उस पल भर में मिल जाता है, जब हम चैतन्य की ओर मुड़ कर अपने आप को समर्पित कर देते हैं। जब जब हम चैतन्य की ओर मुड़ जाते हैं, परमात्मा का प्रेम हमें उस पल में पूरी तरह से घेर लेता है। अब अपने आप को इस प्रेम के दिव्य प्रकाश में आवृत पाएं। आपके हर अंग में परमात्मा की शांति धीरे धीरे फैल रही है। जहाँ जहाँ पर तनाव था, अब सब कुछ हल्का हो रहा है। आपके पैर, टांगे, घुटने, कमर, सीना, कंधे, हाथ कोहनिया, उंगलिया। आपका पूरा शरीर सुहानेपन में घुलता जा रहा है। आपका हृदय शांति, आनंद और उल्लास से भर रहा है। गहरी सांस लें और छोड़ दें। आपका गला नाक कान हॉट, चेहरे की सारी, मांसपेशियां तनाव से मुक्त होकर चैतन्य के दिव्य प्रकाश से सराबोर हैं। आपका पूरा शरीर शांति और प्रेम से प्रकाशित है। इस प्रकाश को मनचाहा रंग दें। इसे चंद्रमा समान या स्वर्णिम या इंद्रधनुषी रंग दें और अपने आप को इस प्रकाश में तैरता हुआ पाए। अब इस प्रकाश को मनपसंद तापमान दें। इस प्रकाश को सुखद महसूस करें अथवा शीतल चंद्रमा समान महसूस करें। हल्के से मुस्कुराए रिकार्ड। गहरी श्वास अंदर लीजिए और छोड़ दीजिए। ध्यान को तृणेत्र पर अलिक रखें। अनायास रखें। अगर ध्यान हट जाता है, तो पहले अपने आसपास की आवाजों पर, फिर अपने शरीर के अहसासों पर, फिर अपनी श्वास पर, अपने हृदय के धड़कन पर और अंत में अपने त्रिनेत्र पर ध्यान फिर से केंद्रित करें। ध्यान की प्रक्रिया अत्यंत दुखदाई है। इसे अपने दिल से महसूस करें और हर श्वास के साथ 1 अंगडाई लेते हुए नन्हे बच्चे की तरह इस सुख में डूबते जाएं। हर्ष वास के साथ अपने आप को चैतन्य की गहराइयों में उतरता हुआ पाएं। यदि चिंताएं उठने लगती हैं, तो उन्हें आकाश के बादलों की तरह चटने दीजिए। चिंताओं से संबंध मत बनाइए। बस बादलों की तरह हवा के झोंकों के साथ बिखरने दीजिए। अब मेरे निर्देशों को मन ही मन में दोहराएं। मैं परमात्मा का अभिन्न अंग हूँ। परमात्मा मेरे प्रियतम, मेरे माता पिता, मेरी प्रेयसी, मेरा गुरु, मेरा सर्वस्व है। परमात्मा 1 सुगंध की तरह मेरे शरीर और आत्मा का हिस्सा है। परमात्मा मेरे साथ हर कदम पर है। मेरी हर कठिनाई में परमात्मा का हाथ मेरे सिर पर हर पल रहा है, आगे भी रहेगा। जब मुझे परमात्मा का अभाव खलता है, तो मैं यह समझ लूं कि परमात्मा भी मुझे मुझसे दूर होकर 1 मां की तरह मुझे पुकार रही है। मैं परमात्मा का उपकरण हूँ। मैं निमित हूँ। परमात्मा मेरे अंदर मेरी हर प्रार्थना में विराजमान हैं। मुझे अपने बाहर संसार में यदि शांति, प्रेम, धन, प्रतिष्ठा की कमी महसूस हो रही है, तो वह मेरे लिए परमात्मा का संकेत है। कि मैं 1 शांत स्थल पर अपने चैतन्य के द्वार को फिर से खोजूं। परमात्मा मुझ से छुपना नहीं चाहते, बल्कि मुझ से मिलकर प्रेम की पूंजी मुझ पर निछावर करना चाहते हैं। गहरी सांस लीजिए और छोड़ दीजिए चैतन्य के द्वार पर, मैं अपने आप को समर्पण करती हूँ। परमात्मा की सृष्टि आनंद विभोर है। मैं भी इस सृष्टि का 1 अभिन्न अंग हूँ। आनंद मेरी आत्मा की भाषा है। परमात्मा के मार्ग में संघर्ष भी आनंद है। मैं परमात्मा के सन्मार्ग के साथ 1 हूँ, मैं विराट के साथ 1 हूँ। मेरा मन शून्यता, शांति, प्रेम और आनंद से भरपूर है। मेरा अहंकार मेरी आत्मा का सेवक है। मेरे सारे रिश्ते मेरी आत्मा के विकास के लिए बने हैं। संसार मेरी आत्मा के विकास के लिए बना है। मैं हर पल संसारी से धार्मिक होती जा रही हूँ। मैं अपनी सारी इच्छाओं को परमात्मा के चरणों में समर्पित करती हूँ। मेरी हर चाह परमात्मा की चाह है। जहाँ मुझे परमात्मा ले जाएं, वहीं मेरा घर है। मैं तैरना छोडकर परमात्मा में दिरने को तैयार हूं। मैं निर्भार हूँ 1 शानदार चील की तरह, मेरी आत्मा परमात्मा की ऊंचाइयों के दिव्य प्रकाश में तैर रही है। जैसे जैसे मेरी आत्मा ऊंचाइयों को छू रही है, वैसे वैसे मेरा ध्यान परमात्मा की गहराइयों में डूब रहा है। मैं परमात्मा के हर ऐश्वर्य से धनी हूँ। मैं संपन्न हूँ। जो परमात्मा की इच्छा है, वह सब पाने को मैं तैयार हूँ। प्रेम से भरे रिश्ते, समाज में प्रतिष्ठा, धन, संपदा, धार्मिक जीवन, अब से, यह सब पाने के लिए मैं पूरी तरह से तैयार हूँ। मैं इस पल में परिपूर्ण रूप से स्वस्थ हूँ। मैं इस पल में पूरी तरह से सुरक्षित हूँ। परमात्मा हर ऐश्वर्य मुझ पर निछावर है। परमात्मा का हर आशीर्वाद मुझे स्वीकार है। मेरा सर्वस्व परमात्मा के निर्देशन के लिए आदरित है। मैं संघर्ष और प्रतिरोध के भाव को समर्पण करती हूँ। मैं परमात्मा के दिखाए हुए मार्ग पर चलने को तैयार हो। मेरी हर सोच, हर प्रक्रिया और हर वाक्य में परमात्मा बसे हुए हैं। हर प्रतिद्वंधी में परमात्मा का स्पष्ट निर्देश। मुझे अब से सुनाई पड़ेगा सही रास्ता। मुझे हर मुश्किल में अब से दिखाई पड़ेगा। मैं परमात्मा के निर्देशों का पालन सरलता से कर पाऊंगी। कोई भी शक्ति मुझे परमात्मा के मार्ग से हटा नहीं सकती। परमात्मा सारी बाधाओं को विलीन कर देंगे। मुझे देखकर दूसरे भी परमात्मा को प्रेम करने के लिए प्रेरित होंगे। जो कुछ भी सम्मान और संपदा मुझे प्राप्त होगी, वह मैं दूसरों के साथ बिना संकोच किए बांटूंगी। मेरी सफलताएं और असफलताएं भी परमात्मा की ही लीला है। मैं जो कुछ भी पाती हूं, वह परमात्मा के कारण है, और जो कुछ भी मुझसे छूट जाता है, वह भी परमात्मा का प्रेम है। मेरी हर जीत और हार, परमात्मा को मैं समर्पित करती हूँ। मेरा संपूर्ण जीवन परमात्मा का आयोजन है। मेरी हर निराशा और मेरी हर तृप्ति में भी उस निराकार की ही लीला है। मैं कभी भी अहंकार के कारण परमात्मा से मुँह नहीं मरुंगी। मेरे जन्मों का अंधकार परमात्मा 1 क्षण में मिटा सकते हैं। मेरे लिए परमात्मा ही सब कुछ है। मेरे लिए परमात्मा ही काफी हैं। मेरी यह चेष्टा भी मेरी नहीं है। यह भी परमात्मा की ही कृति है। मैं परमात्मा का उपकरण हूँ। मैं निमित हूँ। परमात्मा ही मेरे अंदर, मेरी हर इच्छा और प्रार्थना में विराजमान हैं। मैं केवल परमात्मा की बांसुरी हूं। परमात्मा मेरा संगीत है। मैं परमात्मा का कमल हूँ। परमात्मा मेरा सुगंध है। मैं आकाश हूँ। परमात्मा मेरी विशालता है। मैं परमात्मा में विलीन हो रही हूँ। मैं परमात्मा में तल्लीन हो रही हूँ। मैं परमात्मा के संगीत में खो रही हूँ। गहरी सांस लें और अपने ध्यान को अपने शरीर के अहसासों पर ले। आए। अपना ध्यान अपने शरीर के भारी बंद, आपके, सोफा या बेड के तले पर आपके चारों ओर की आवाजों पर फिर से ले आएं। अगले कुछ वासों के साथ अपने ध्यान को अपनी उंगलियों पर ले। आएं। उन्हें धीमे से फिर से चलित करें दाइर। मुड़ें और आँखों को खोलें। अब अपने हाथों का सहारा लेते हुए उठ कर बैठ जाएं। दोनों हाथों को आपस में रगड़ें और अपनी आँखों पर रख लें। raotacooc गहरा श्वास लें और छोड़ दें। आपके इस ध्यान में जो भी दिव्य अनुभव आपको हुए, उन्हें याद कीजिए। यदि अनुभव अस्पष्ट थे, तो भी परमात्मा को धन्यवाद दीजिए। विश्वास रखिए कि सही समय पर इन खास अनुभवों का मतलब आप अकस्मात ही जान जाएंगे। अब दोनों हाथों को उठाकर, पूरी तरह से आकाश की ओर खींचें। अपने पैर स्ट्रेच करें और सोने की या फिर अपने काम पर जाने की तैयारी शुरू करें। मेरा नाम सलिला है और मैं 1 आयुर्वेदा हेल्थ कोच हूँ। मैं आपकी आभारी हूं कि आपने प्रेम पूर्वक मेरे निर्देश सुने अपने विचार कमेंट्स में शेयर कीजिए और सबस्क्राइब करना, बिल्कुल मत भूलिएगा कि मैं आगे भी आपके लिए ऐसे वीडियोज बनाती रहूं। ओम शांति शांति शांति। o a conoco।
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